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Director-Mukesh Dalal

कल कंप्यूटर का है, यह सच उन्होंने दो दशक पहले ही समझ लिया था | यही कारण रहा कि 1988 में इंदौर जाकर कंप्यूटर सीखा. उस समय खंडवा में कंप्यूटर थे ही नहीं. आज वे खंडवा जिले के 1000 बच्चों को कंप्यूटर ट्रेनिंग दे चुके हैं. करीब 500 से अधिक को जॉब दिला चुके हैं. आज वे दलाल इंस्टिट्यूट के सुप्रीमो हैं .

भारतीय स्टेट बैंक में मैनेजर रहे श्री जयंतीलाल दलाल के सबसे छोटे बेटे मुकेश मूलतः गुजरती समाज के है. एम. एस.सी. (आई.टी.), पीजीडीसीए और एमसीए तक शिक्षित श्री दलाल ने अपने कैरिएर कि शुरुआत 300 रूपये महीना कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में इंदौर में की.  बाद में दो वर्ष खंडवा में टेलिकॉम विभाग में बतौर ऑपरेटर ही कार्य किया. 1993 में आपने नए विद्यार्थियों को कंप्यूटर शिक्षा से जोड़ने कि जिद के साथ दलाल कंप्यूटर कि शुरुआत की. जुनून केवल इतना कि नई पीढ़ी कंप्यूटर कोर्सेज को सीखे और रोज़गार पाए. आपको मध्यप्रदेश शासन के आईसेक्ट की मान्यता मिली, वाही पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी के शासन द्वारा मान्यता प्राप्त अनेक कोर्स बीएससी (आईटी), बीसीए, बीबीए सहित एम. एस.सी. (आई.टी.), पीजीडीसीए, एमसीए और एमबीए कोर्स खंडवा में आरम्भ किए.

नौकरी के दौरान ही श्री दलाल ने तय किया था कि अब खंडवा लौटकर नई पीढ़ी को जाग्रत करेंगे. इस जुनून और जिद में पिता ने मदद की पहला कंप्यूटर खरीदने में. बाद में पूरा कॉलेज खड़ा किया अपने बलबूते पर. करीब 35 कंप्यूटर, शानदार लाइब्ररी, फर्निश्ड क्लासरूम, 10 से अधिक फेकल्टिज़ और सबसे बड़ी चीज 500 से अधिक बच्चों को जॉब.

श्री दलाल कहते है कि पैसों कि कमी के कारण हर बार रुके वर्ना विस्तार कि व्यापक संभावना है. फिर भी जिद है कि स्वयं का कॉलेज भवन बनाकर और अधिक सुविधा छात्र-छत्राओं को देंगे. वे कहते है कि ‘जॉब ओरिएंटेड कोर्सेज’ का ही नतीजा है कि इतने विद्यार्थी रोज़गार पा सके. वे इस जिद के लिए सदैव समर्पित रहते है. इतना ही नहीं अब उनकी पत्नी श्रीमती मनीषा दलाल भी कॉलेज में क्लासेज लेकर उनका साथ देती है.

वे चाहते हैं कि ग्रामीण अंचल के बच्चें, साधन-सुविधा समय के अभाव वाले विद्यार्थी जो जॉब करते हुए पढना चाहते हैं, उनके लिए और बेहतर कर सके, इसी उधेड़बुन में वे लगे रहते है.